TOT Panchayat
Women Training Program
Awernesh programn
Legal Programme
महेश ग्रामीण सेवा संस्थान एक गैर-लाभकारी संस्था (NGO) है, जो अमरोहा ज़िले में समुदायों के बीच सकारात्मक परिवर्तन और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2008 में स्थापित, यह संस्था व्यक्तियों और समूहों द्वारा झेली जा रही विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और कानूनी चुनौतियों के समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उद्देश्य: Advocacy (वकालत): हम हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए कार्य करते हैं तथा नीतिगत बदलाव और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। शिक्षा एवं साक्षरता: हम शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास रखते हैं और विशेष रूप से वंचित एवं पिछड़े वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु कार्य करते हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT): हम ICT के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाते हैं, डिजिटल विभाजन को कम करते हैं तथा डिजिटल साक्षरता और सूचना तक पहुंच को बढ़ावा देते हैं। कानूनी जागरूकता एवं सहायता: हम कानूनी साक्षरता को बढ़ाते हैं और कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें न्याय और अपने अधिकारों की सुरक्षा मिल सके। महिला विकास एवं सशक्तिकरण: हम लैंगिक समानता को बढ़ावा देते हैं और महिलाओं को कौशल विकास, आर्थिक अवसरों और भेदभाव व हिंसा के उन्मूलन के माध्यम से सशक्त बनाते हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण: हम स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्राथमिकता देते हैं, विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य और स्वच्छता पर ध्यान देते हैं। श्रम एवं रोजगार: हम श्रमिकों के अधिकारों के लिए कार्य करते हैं, बेहतर रोजगार अवसरों को बढ़ावा देते हैं और कौशल विकास व आजीविका सुधार के प्रयासों का समर्थन करते हैं। सूक्ष्म वित्त (SHGs): हम स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के गठन और सुदृढ़ीकरण के माध्यम से लोगों, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और गरीबी उन्मूलन में सहयोग करते हैं। मुख्य गतिविधियाँ: जागरूकता अभियान और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन। शिक्षा और साक्षरता से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन। ICT प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करना। कानूनी सहायता शिविर और जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित करना। महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास कार्यक्रम चलाना। स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता सत्र और स्वच्छता अभियान आयोजित करना। श्रमिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए नीतिगत प्रयास करना। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का गठन और उन्हें सशक्त बनाने के लिए सूक्ष्म वित्त एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाना।
An integrated approach to build a equitable and empowered society
OUR VISION
We envision thriving and resilient communities where every individual has equitable access to opportunities, rights, and resources, fostering a society built on justice, equality, and sustainability.
OUR MISSION
MGSS endeavors to unleash the potential of disadvantaged working women and their children to succeed in life by providing education, specialized childcare, health care, livelihood skills, and community development services. We know that child and gender development are fundamental to our work.
Our program focuses on promoting and safeguarding the rights of children and women to make choices and decisions within sexual relationships. We address issues such as child sexual abuse, workplace sexual harassment, domestic violence, forced marriages, child mobility, child trafficking, the Girl Icon program, and road safety awareness. Through education, advocacy, counseling, and support services, we strive to raise awareness, prevent abuse, empower survivors, and create safer environments. By promoting gender equality, consent, and respect, we aim to eradicate harmful practices and empower children and women to lead lives free from violence and coercion, ensuring their rights to choose and decide are upheld.
यौन उत्पीड़न एक अत्यंत गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है जो महिलाओं को अनुभव करने को मिलता है। यह एक शक्तिशाली और अनुप्रयोग द्वारा किया जाने वाला अपमानजनक और अत्याचारिक व्यवहार होता है, जो महिलाओं की आत्म-सम्मान और स्थिति को क्षति पहुंचाता है। यह विभिन्न प्रकार के होता है, जैसे: शारीरिक उत्पीड़न: यह शारीरिक हमले, हिंसा, छेड़छाड़ और अन्य शारीरिक अत्याचार शामिल करता है। मानसिक उत्पीड़न: यह मानसिक अत्याचार, छीना जाना, बेइज्जती, आत्महत्या की धमकी और अन्य मानसिक प्रक्रियाओं में यौन उत्पीड़न को शामिल करता है। मौखिक उत्पीड़न: इसमें अश्लील भाषा का उपयोग, गंदे अनुभवों को साझा करना, यौन निर्माण के लिए मजाक बनाना, और अन्य यौन अत्याचार शामिल होता है। आर्थिक उत्पीड़न: यह महिलाओं के साथ यौन शोषण के लिए आर्थिक संकट का उपयोग करता है, जैसे कि काम में बढ़ावा करने के लिए यौन उत्पीड़न का धमका या यौन शोषण के बदले पैसे का मांग करना। यौन उत्पीड़न: यह व्यक्ति के साथ अनचाहे यौन संबंधों को थोपना, यौन उत्पीड़न, बलात्कार और अन्य यौन अपराधों को शामिल करता है। सामाजिक उत्पीड़न: इसमें सामाजिक दबाव, स्थिति और समाज के अन्य सदस्यों द्वारा यौन उत्पीड़न की धमकी और प्रेरणा शामिल होती है। सांस्कृतिक उत्पीड़न: इसमें धार्मिक और सांस्कृतिक मानदंडों के उल्लंघन, स्त्रीवाद, और समाज में असमानता के रूप में यौन उत्पीड़न शामिल होता है। पारिवारिक उत्पीड़न: यह परिवार के सदस्यों, विशेष रूप से अधिकारी, सास, सासू, और अन्य परिवार के सदस्यों द्वारा महिलाओं पर यौन अधिकारों के उल्लंघन को शामिल करता है।
Sexual harassment is considered as a violation of a woman’s fundamental right to equality, which right is guaranteed by Articles 14 and 15 of the Constitution. Workplace sexual harassment creates an insecure and hostile work environment, thereby discouraging women’s participation in work and adversely affecting their social and economic growth. Sexual harassment is not only viewed as a discrimination problem related to safety and health, but also as a violation of fundamental rights and human rights. It is offensive at a very personal level and in a way undermines the right to equal opportunity and equal treatment of women at the workplace.
महेश ग्रामीण सेवा संस्थान जिला अमरोहा में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों, पैदल चलने वालों और ड्राइवरों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सड़क सुरक्षा वास्तव में महत्वपूर्ण है। यहां कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं कि संगठन सड़क सुरक्षा में कैसे योगदान दे सकता है: जागरूकता अभियान: लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों और विनियमों के बारे में शिक्षित करने के लिए स्थानीय समुदायों में जागरूकता अभियान और कार्यशालाएँ आयोजित करें। सावधानी से गाड़ी चलाने, यातायात संकेतों का पालन करने और पैदल चलने वालों का सम्मान करने के महत्व पर जोर दें। ड्राइवर प्रशिक्षण कार्यक्रम: ड्राइवरों, विशेषकर वाणिज्यिक वाहन चलाने वालों के कौशल को बढ़ाने के लिए ड्राइवर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। ये कार्यक्रम रक्षात्मक ड्राइविंग तकनीकों, आपातकालीन स्थितियों से निपटने और सड़क संकेतों को समझने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। सामुदायिक जुड़ाव: स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर उनकी विशिष्ट सड़क सुरक्षा चुनौतियों और चिंताओं को समझें। समुदाय के सदस्यों को सड़क सुरक्षा पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने और किसी भी खतरनाक सड़क स्थिति या लापरवाह ड्राइविंग व्यवहार की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करें।
व्यावसायिक उद्देश्य से किए जा रहे किसी कार्य के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त किया जाता है तो वह बाल श्रम कहलाता है। इसे भारत में गैर कानूनी करार दिया गया है। भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है। वेश्यावृत्ति या उत्खनन, कृषि, माता पिता के व्यापार में मदद, अपना स्वयं का लघु व्यवसाय या अन्य छोटे मोटे काम हो सकते हैं कुछ बच्चे के गाइड के रूप में काम करते हैं, कभी-कभी उन्हें दुकान और रेस्तरां (जहाँ वे वेटर के रूप में भी काम करते हैं) के काम में लगा दिया जाता है। अन्य बच्चों से बलपूर्वक परिश्रम-साध्य और दोहराव वाले काम लेते हैं जैसे :बक्से को बनाना, जूते पॉलिश,धनिया बेचना,स्टोर के उत्पादों को भंडारण करना और साफ-सफाई करना। हालांकि, कारखानों और मिठाई की दूकान, के अलावा अधिकांश बच्चे अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे "सड़कों पर कई चीज़ें बेचना, पटाकों के कारखानों में, कृषि में काम करना या [बच्चों का घरेलू कार्य|घरों में छिप कर काम करना] - ये कार्य सरकारी श्रम निरीक्षकों और मीडिया की जांच की पहुँच से दूर रहते है। "और ये सभी काम सभी प्रकार के मौसम में तथा न्यूनतम वेतन के लिए किया गया था यूनिसेफ के अनुसार, दुनिया में लगभग २.५ करोड बच्चे, जिनकी आयु २-१७ साल के बीच है वे बाल-श्रम में लिप्त हैं, जबकि इसमें घरेलू श्रम शामिल नहीं है। सबसे व्यापक अस्वीकार कर देने वाले बाल-श्रम के रूप हैं जिनमे [बच्चों का सैन्य उपयोग] साथ ही बाल वेश्यावृत्ति . शामिल है। कम विवादास्पद और कुछ प्रतिबंधों के साथ कानूनी रूप से मान्य कुछ काम है जैसे बाल अभिनेता और बाल गायक, साथ ही साथ स्कूलवर्ष (सीजनल कार्य) के बाद का कार्य और अपना कोई व्यापार जो स्कूल के घंटों के बाद होने काम आदि शामिल है।
अमरोहा, 12 जनवरी भारत के महान् आध्यात्मिक संत स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर विवेकवान् नेतृत्व विकास के लिए समर्पित "पंचपरमेश्वर विद्यापीठ" प्रशिक्षण एवम संदर्भ केंद्र का शुभारंभ अतिथियों द्वारा केंद्र का स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया गया। महेश ग्रामीण सेवा संस्थान, डाक बंगला कालोनी निकट रेलवे स्टेशन अमरोहा द्वारा संचालित विद्यापीठ केन्द्र के शुभारंभ कार्यक्रम पर एल डी एम कार्यालय से श्री योगेश कुमार ने कहा कि समाज को सही दिशा में गतिशील करने के लिये सद् विवेकी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। बाल कल्याण समिति से श्री हेमराज सिंह ने कहा कि कुशल एवं विवेकवान् नेतृत्व, अन्तर्विरोधों में उचित सामंजस्य स्थापित करके समाज के सामुदायिक स्वरूप को संरक्षित और संवर्धित करता है। अमरोहा पंच परमेश्वर विद्यापीठ केन्द्र के संरक्षक श्री महेश सिंह ने कहा कि यह पंचपरमेश्वर विद्यापीठ विवेकवान नेतृत्व के विकास हेतु अध्ययन एवं प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। इसके अन्तर्गत समाज और गाँव जीवन से सम्बन्धित विषयों तथा पंचायतों में बेहतर नेतृत्व क्षमता विकास हेतु सार्थक अध्ययन, प्रशिक्षण, शोध एवं प्रयोगात्मक कार्य किया जायेगा। विद्यापीठ के संचालक शशिराज जी ने कहा कि विवेकवान नेतृत्व विकास हेतु पंचपरमेश्वर विद्यापीठ द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोगी संगठनो द्वारा प्रशिक्षण एवं संदर्भ केंद्र बनाये जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में आज अमरोहा में भी एक प्रशिक्षण और सन्दर्भ केन्द् की स्थापना की गई है।
महेश ग्रामीण सेवा संस्थान के संयुक्त प्रयासों में, एक महत्वपूर्ण कदम उत्साहजनक रूप से आगे बढ़ा है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत, एक मतदाता जागरूकता रैली का आयोजन किया गया है। इस रैली का उद्देश्य मतदाताओं को जागरूक करना और उन्हें चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के महत्व को समझाना है। यह रैली दिनांक 12-04-2024 को विकास भवन अमरोहा में संपन्न हुई। समाज के इस महत्वपूर्ण कार्य में भाग लेने के लिए स्थानीय ट्रांसजेंडर/किन्नर व अधिकारी गण ओर संस्था स्टाप आदि शामिल हुए इस अभियान में हम सभी का साथ चाहिए ताकि हम एक सशक्त और समर्थ समाज की ओर अग्रसर हो सकें। आप सभी से आग्रह है कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेकर अपना समर्थन प्रदान करें।
आर्टिजन कार्ड हस्तशिल्प कारीगरों को एक पहचान देगा। इसकी मदद से कार्ड धारक केंद्र या राज्य सरकार के मार्केटिंग प्रोग्राम में भाग ले सकते हैं। देशभर के सरकारी फेयर में उन्हें मुफ्त स्टॉल व आने-जाने का किराया दिया जाएगा कारीगर आईडी कार्ड एक फोटो पहचान पत्र है जो एक कारीगर द्वारा किए गए शिल्प को दर्शाता है । फ़ायदे। कारीगर आईडी कार्ड विपणन, ऋण, बीमा आदि तक पहुंच के लिए विभिन्न हथकरघा और हस्तशिल्प योजनाओं तक पहुंचने में मदद करता है। हस्तशिल्प कारीगरों को MUDRA ऋण और मार्जिन मनी प्रदान करा रहा है। हस्तशिल्प कार्ड के फायदे से आप अपने काम को और भढाने और शुरू करने के लिए बैंकों के माध्यम से हस्तशिल्प राशि / मार्जिन राशि ले सकते है।
महेश ग्रामीण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित कार्यशाला: महावारी के दौरान शारीरिक और मानसिक बदलावों पर जानकारी महेश ग्रामीण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य किशोरियों को महावारी के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों के बारे में जानकारी देना है, ताकि वे इन परिवर्तनों को समझ सकें और उनका सामना कर सकें। महावारी के दौरान शारीरिक बदलावों में रक्तस्राव, पेट में दर्द, थकान, और त्वचा में बदलाव शामिल हैं। किशोरियों को बताया जाता है कि यह बदलाव सामान्य हैं और शरीर के हार्मोनल चक्र का हिस्सा हैं। पेट के दर्द को कम करने के लिए गर्म पानी की बोतल या हल्का व्यायाम मददगार हो सकता है। मानसिक बदलावों में मूड स्विंग्स, चिंता और आत्म-संवेदनशीलता शामिल हो सकते हैं। इन भावनाओं को समझना और सकारात्मक तरीके से स्वीकारना जरूरी है। किशोरियों को यह बताया जाता है कि ये परिवर्तन स्वाभाविक हैं और उन्हें इस दौरान आत्म-देखभाल की आदतें अपनानी चाहिए। कार्यशाला में शारीरिक गतिविधियाँ, सही आहार, पर्याप्त नींद, और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के महत्व पर जोर दिया जाता है। अंत में, किशोरियों को महावारी को एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया जाता है।
बाल अधिकार वे अधिकार हैं जो बच्चों के अच्छे और सुरक्षित जीवन के लिए जरूरी होते हैं। इन अधिकारों का उद्देश्य बच्चों को हर प्रकार के शोषण, हिंसा, भेदभाव, और उपेक्षा से बचाना है, ताकि वे शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रह सकें और अपनी पूरी क्षमता को प्राप्त कर सकें। बाल अधिकारों का पालन और सुरक्षा बच्चों के जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, और मानसिक विकास। बाल अधिकारों के प्रमुख सिद्धांत: जीवन, अस्तित्व और सुरक्षा का अधिकार हर बच्चे को जीवन जीने का अधिकार है, और उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हिंसा, शोषण या भेदभाव से बचाया जाना चाहिए। बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार है। शिक्षा का अधिकार बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। शिक्षा उनके विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे उन्हें अपनी क्षमता को पहचानने और समाज में समान अवसर प्राप्त करने का अवसर मिलता है। स्वास्थ्य का अधिकार बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करने का अधिकार है। इसमें पोषण, टीकाकरण, और स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं शामिल हैं, ताकि बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें। भेदभाव से मुक्ति बच्चों को किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचाया जाना चाहिए, चाहे वह लिंग, जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति के आधार पर हो। सभी बच्चों को समान अधिकार प्राप्त हैं। मत और विचार व्यक्त करने का अधिकार हर बच्चे को अपनी राय और विचार व्यक्त करने का अधिकार है। उनके विचारों को महत्व दिया जाना चाहिए, और समाज में उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए। मूलभूत संसाधनों तक पहुंच का अधिकार बच्चों को खाद्य, आवास, पोषण, और अन्य जीवन की आवश्यकताएँ उपलब्ध होनी चाहिए। यह उनके विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास: संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकारों का समझौता (UNCRC): संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अंतर्गत 54 लेख हैं, जो बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करते हैं। भारत में बाल अधिकार: भारत में बाल अधिकारों की रक्षा संविधान द्वारा की जाती है। इसके अलावा, बाल श्रम (निषेध) अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, और सार्वभौमिक शिक्षा अधिकार जैसी कई कानूनी व्यवस्थाएं बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करती हैं।
महेश ग्रामीण सेवा संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को उनके आत्म-संप्रभुता और आत्म-निर्णय के अधिकार के प्रति जागरूक करना है। संस्थान यह मानता है कि हर व्यक्ति, खासकर महिलाएँ और बच्चे, को अपनी इच्छाओं और विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में भाग लेने का अधिकार होना चाहिए। संस्थान ने कई कार्यशालाएँ और कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाती है, ताकि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, करियर आदि में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकें। इसके अलावा, बच्चों को भी यह सिखाया जाता है कि वे अपनी आवाज़ उठाकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने जीवन के फैसलों में अधिक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी बन रहे हैं।
समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला दिवस पखवाड़ा का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। इस अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ और रैलियाँ आयोजित की गईं, जिनमें महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने महिलाओं की भूमिका को समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण बताया और समानता व सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। छात्राओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और समाज में उनके योगदान को मान्यता देना है, जिससे एक समावेशी और संवेदनशील वातावरण बन सके।
कार्यक्रम का उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश कोएलिशन टू एम्पावर गर्ल्स (UPCEG) के सहयोग से “सशक्त नारी, सशक्त समाज” अभियान के तहत यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किशोरियों को सशक्त बनाना, उन्हें समान अवसरों की जानकारी देना तथा समाज में उनकी सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित करना रहा। मुख्य गतिविधियाँ: कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के लिए कई प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें शामिल थीं: ✦ संवाद सत्र: किशोरियों के विचारों और चुनौतियों को समझने हेतु संवाद ✦ नेतृत्व जागरूकता सत्र: आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता पर केंद्रित ✦ सरकारी योजनाओं की जानकारी: मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, रानी लक्ष्मीबाई योजना, और POCSO अधिनियम की जानकारी ✦ सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गीत, नाटक व नृत्य ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया मुख्य वक्तव्य: “किशोरियों को कानूनी और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूक करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” — श्री हेमराज सिंह, सदस्य, बाल कल्याण समिति “सशक्त नारी ही सशक्त समाज की नींव है।” — श्री महेश सिंह, सचिव, महेश ग्रामीण सेवा संस्थान विशेष सहभागिता: इस कार्यक्रम में मिलान – बी द चेंज संस्था की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जो पिछले 18 वर्षों से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के वंचित समुदायों में किशोरियों के साथ कार्य कर रही है। संस्था अब तक एक लाख से अधिक बालिकाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर चुकी है।
SHG–VO–CLF संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान द्वारा आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन (VO) और कम्युनिटी लर्निंग फ़ैसिलिटेटर (CLF) के सदस्यों की क्षमता का विकास करना था। प्रशिक्षण के अंतर्गत SHG के दस्तावेज़ीकरण, बचत–ऋण प्रबंधन, मीटिंग संचालन, तथा वित्तीय अनुशासन पर सत्र आयोजित किए गए। VO स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण, निगरानी, योजना निर्माण, और समूहों के बीच समन्वय पर मार्गदर्शन दिया गया। CLF के लिए नेतृत्व क्षमता, रिकॉर्ड-कीपिंग, समुदाय संचलन, फील्ड गतिविधियों की निगरानी, तथा समस्या समाधान के कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में समूह चर्चा, केस स्टडी, रोल प्ले और व्यावहारिक उदाहरणों का उपयोग किया गया। समापन सत्र में प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएँ ली गईं। प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप SHG–VO–CLF की कार्यक्षमता, संवाद कौशल और संगठनात्मक क्षमता में सुधार देखने को मिला।
विजन डॉक्यूमेंट्स निर्माण प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन (VO) और क्लस्टर स्तरीय संघ (CLF) की महिलाओं को अपने संगठन के भविष्य की स्पष्ट योजना बनाने के लिए सक्षम करना है। यह प्रशिक्षण National Rural Livelihoods Mission (NRLM) के अंतर्गत आयोजित किया जाता है। इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विजन की अवधारणा, उसके महत्व तथा समुदाय की समस्याओं और आवश्यकताओं की पहचान करने की प्रक्रिया समझाई जाती है। महिलाएँ समूह चर्चा और चार्ट पेपर के माध्यम से अपने गांव की सामाजिक, आर्थिक और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों पर विचार करती हैं तथा उनके समाधान के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करती हैं। प्रशिक्षण के दौरान विजन-1, विजन-2 और विजन-3 के माध्यम से संगठन की प्रगति की दिशा तय की जाती है और एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाती है। इससे महिलाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है, सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है तथा गांव के समग्र विकास के लिए एक ठोस योजना तैयार होती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अमरोहा, सम्भल, रामपुर, मुरादाबाद एवं मेरठ जनपदों के पराविधिक स्वयंसेवकों (अधिकार मित्र) हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान महेश सिंह द्वारा महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण संबंधी POSH अधिनियम, 2013 पर विस्तृत प्रशिक्षण सत्र लिया गया, जिसमें अधिनियम के प्रमुख प्रावधान, शिकायत निवारण प्रक्रिया एवं कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ द्वारा उत्कृष्ट कार्य एवं प्रभावी प्रशिक्षण देने के लिए महेश सिंह को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पराविधिक स्वयंसेवकों की क्षमता वृद्धि करना एवं समाज में विधिक जागरूकता को सशक्त बनाना रहा।
विशेष विवाह अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण (विजन) विषयों पर एक जागरूकता शिविर का आयोजन वैष्णो कन्या इंटर कॉलेज, मखदुमपुर में किया गया, जिसमें उपस्थित प्रतिभागियों को इन विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों, अधिकारों एवं सामाजिक जागरूकता के पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
DONATE NOW!
Make a generous donation to help us reach more beneficiaries.
Account Number: XXXXXX3463
Bank: Union Bank of India
Branch: Amroha
IFSC Code: UBIN0559083
All donations are eligible for tax savings under 80G.
VOLUNTEER WITH US
Volunteer with us for making a difference in somebody's life and also it is a good opportunity for you to give back to the society. For more information, mail us at [email protected]
Mohalla Peergarh, Dak Bangla Colony, Near Railway Station, Amroha, Uttar Pradesh, 244221.
9457422477